Showing posts with label Press release. Show all posts
Showing posts with label Press release. Show all posts

Thursday, 10 October 2013

युवा रंग निर्देशक प्रवीण कुमार गुंजन पर पुलिसिया हमले की निंदा

निरंकुश पुलिसिया राज के खिलाफ सांस्कृतिक प्रतिवाद वक्त की जरूरत है: जसम

नई दिल्ली: 08 अक्टूबर 2013
जन संस्कृति मंच देश के प्रतिभावान युवा रंग निर्देशक प्रवीण कुमार गुंजन की बिहार के बेगुसराय में नगर थाना प्रभारी द्वारा बर्बर पिटाई की कठोरतम शब्दों में निंदा करता है और दोषी पुलिस अधिकारी की बर्खास्तगी की मांग करता है तथा इस बर्बर पुलिसिया हमले के खिलाफ आंदोलनरत बेगूसराय के संस्कृतिकर्मियों के प्रति अपनी एकजुटता का इजहार करता है। एनएसडी से पास आउट प्रवीण कुमार गुंजन ने निर्देशन की शुरुआत ‘अंधा युग’ से की थी। उसके बाद उन्होंने मुक्तिबोध की कहानी ‘समझौता’ पर आधारित नाटक का निर्देशन किया, जो बेहद चर्चित रहा। उन्होंने शेक्सपियर के मशहूर नाटक ‘मैकबेथ’ का भी निर्देशन किया। प्रवीण द्वारा नाटकों का चुनाव और बेगुसराय जैसी जगह को अपनी गतिविधियों का केंद्र बनाना भी अपने आप में महत्वपूर्ण है। भारत के राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदित संगीत नाटक कला अकादमी का बिस्मिल्ला खां युवा पुरस्कार और बिहार सरकार का भिखारी ठाकुर युवा रंग सम्मान पा चुके इस युवा रंग निर्देशक के ऊपर पुलिस अगर बेवजह इस तरह बर्बर कार्रवाई का दुस्साहस कर सकती है, तो कल्पना की जा सकती है कि इस देश की आम जनता और आम संस्कृतिकर्मियों के साथ उसका किस तरह का रवैया रहता होगा। 
बेगूसराय से मिली सूचना के अनुसार प्रवीण कुमार गुंजन सोमवार की रात रिहर्सल के बाद रेलवे स्टेशन के पास स्थित चाय की दूकान के पास अपनी बाइक लगाकर साथी रंगकर्मियों के साथ पी रहे थे। चाय पीने के बाद वे लौटने ही वाले थे, तभी थाना प्रभारी अपने गश्ती दल के साथ पहुंचे और उनकी बाइक पर तीन सवारी होने का इल्जाम लगाया। उन्होंने कहा कि बाइक जब चल ही नहीं रही है, तो तीन सवारी कैसे हो गए? गुंजन की खूबसूरत दाढ़ी, उनका कैजुअल ड्रेस और उनके साथ कुछ रंगकर्मी युवकों का होना और पुलिसिया आतंक के आगे उनका न दबना, इतना काफी था बिहार पुलिस के लिए। थाना प्रभारी ने उन पर अपराधी होने का आरोप लगाया और उन्हें पीटना शुरू कर दिया। गुंजन ने उससे यह भी कहा कि वह अपने एसपी और जिलाधिकारी से फोन करके बात कर ले, लेकिन उसने एक नहीं सुनी और उनकी पिटाई जारी रखी। 
मंगलवार 8 अक्टूबर को जब  फैक्ट्स, जसम, आशीर्वाद रंगमंडल, नवतरंग से जुड़े रंगकर्मियों समेत बेगूसराय के तमाम साहित्यकार-संस्कृतिकर्मियों ने इसका प्रतिवाद किया, तो जिला प्रशासन ने थाना प्रभारी को लाइन हाजिर किया। हालांकि यह भी सूचना मिल रही है कि पुलिस अपने बचाव में प्रवीण और उनके साथियों पर फर्जी मुकदमा दर्ज करने की तैयारी कर रही है। हम इस तरह की संभावित साजिश का पुरजोर करते हैं और बिहार सरकार से यह मांग करते है कि वह तत्काल थाना प्रभारी की बर्खास्तगी की कार्रवाई करे, ताकि पुलिसकर्मियों को यह सबक मिले, कि अगर वे बेगुनाहों पर जुल्म करेंगे, तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई हो सकती है। 
प्रवीण कुमार गुंजन की बर्बर पिटाई ने एक बार फिर से पुलिस राज के खिलाफ मजबूत जन प्रतिवाद की जरूरत को सामने लाया है। उन पर किए गए हमले का सही जवाब यही होगा कि देश और बिहार के संस्कृतिकर्मी सख्त पुलिस राज की वकालत करने वाली और पुलिसिया बर्बरता को शह देने वाली राजनीतिक शक्तियों, सरकारों और विचारों का भी हरसंभव और हर मौके पर अपनी कलाओं के जरिए विरोध करें। देश में बढ़ते निरंकुश पुलिसिया राज के खिलाफ सांस्कृतिक प्रतिवाद वक्त की जरूरत है। 

सुधीर सुमन
राष्ट्रीय सहसचिव, जन संस्कृति मंच
मोबाइल: 09868990959


Wednesday, 28 August 2013

राज्य प्रायोजित साजिश का शिकार हेम

हाथ में दर्द बढ़ने के कारण हेम महाराष्ट्र में डॉ.प्रकाश आम्टे के अस्पताल में इलाज कराने के लिये जा रहे थे, परन्तु महाराष्ट्र पुलिस ने उन्हें रास्ते से बलारशाह स्टेशन से उठाकर 350 किलोमीटर दूर अहेरी थाना क्षेत्र (गढचिरोली) में झूठे मुकदमे में गिरफ्तार दिखाया है...

दिनांक 27 अगस्त 2013 को विभिन्न जन संगठनों व बुद्धिजीवियों द्वारा जेएनयू छात्र हेम मिश्रा की गिरफ्तारी के विरोध में संयुक्त रूप से एक प्रेस वार्ता का आयोजन उत्तराखण्ड के हल्द्वानी स्थित एक रेस्टोरेंट में किया गया. प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुये वक्ताओं ने कहा कि संस्कृतिकर्मी, राजनैतिक कार्यकर्ता व जेएनयू के छात्र हेम मिश्रा को महाराष्ट्र पुलिस द्वारा झूठे और फर्जी मुकदमे में फंसाकर गिरफ्तार किया गया है. हम हेम मिश्रा की गिरफ्तारी की कड़े शब्दों में निन्दा करते हैं तथा बिना शर्त रिहाई की मांग करते हैं.
hem-mishra-press-varta
प्रेस को सम्बोधित करते हुये वक्ताओं ने कहा कि अल्मोड़ा निवासी हेम मिश्रा 1996 से ही उत्तराखण्ड में प्रगतिशील छात्र मंच (पीएसएफ) से जुड़कर अपने गीतों व नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से छात्र, मजदूर, किसानों के हितों के लिये अपनी आवाज बुलन्द करते रहे हैं. 2009 से 2011 तक क्रान्तिकारी जनवादी मोर्चा (आरडीएफ) की राज्य कमेटी के सदस्य के रूप में जनता के मुद्दों पर संघर्षरत रहे.
वर्ष 2009 में पीयूडीआर और पीयूसीएल की संयुक्त टीम के साथ मिलकर उन्होंने उत्तराखण्ड में पुलिस दमन पर फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट के माध्यम से पुलिस दमन को उजागर किया. हेम मिश्रा राजनीतिक बंदी रिहाई कमेटी (सीआरपीपी) के साथ मिलकर देशभर में जेलों में बन्द राजनीतिक बंदियों की रिहाई के लिये भी काम करते रहे हैं.
वर्तमान में हेम जेएनयू में चायनीज लैंग्वेज के छात्र हैं तथा डेमोक्रेटिक स्टूडेंट यूनियन (डीएसयू) की कार्यकारिणी सदस्य के रूप में छात्रहितों व मेहनतकश जनता के शोषण-उत्पीड़न के खिलाफ अपने गीतों के माध्यम से आवाज उठाते रहे हैं. वामपंथी विचारधारा के हेम मिश्रा पिछले डेढ दशक से अपने राजनीतिक कार्यों व सास्ंकृतिक कर्म से समाज की विषमता, मेहनतकश जनता की तकलीफों व जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष करते रहे हैं.
प्रेस को सम्बोधित करते हुये वक्ताओं ने कहा कि हेम मिश्रा के बांये हाथ में जन्मजात आंशिक विकलांगता है, जिसके कारण पैदा होने के छह दिन बाद से ही एम्स में उनका इलाज चला और बाद में चेन्नई सहित दक्षिण भारत के विभिन्न जगहों पर उन्होंने अपने हाथ का इलाज करवाया.
इस बीच उनके हाथ में पुनः दर्द बढ़ने के कारण वे महाराष्ट्र में डॉ.प्रकाश आम्टे के अस्पताल में इलाज कराने के लिये जा रहे थे, परन्तु महाराष्ट्र पुलिस ने उन्हें रास्ते से ही उठाकर (बलारशाह स्टेशन से उठाकर 350 किलोमीटर दूर) अहेरी थाना क्षेत्र (गढचिरोली) में झूठे मुकदमे में गिरफ्तार दिखाया है. महाराष्ट्र पुलिस ने हेम मिश्रा को दो स्थानीय युवकों महेश तिर्की और पांडु नरोटे के साथ माओवादी कुरियर होने का झूठा आरोप लगाकर गिरफ्तार किया है.
प्रेस को संबोधित करते हुये वक्ताओं ने कहा कि आज पूरे देश में जनता प्राकृतिक सम्पदा (जल, जंगल, जमीन, खनिज) की लूट के खिलाफ विरोध-प्रतिरोध कर रही है. प्राकृतिक सम्पदा की लूट के खिलाफ व शोषण-उत्पीड़न के खिलाफ जनता के आक्रोश को कुचलने के लिये सरकारें दमनचक्र चला रही हैं.
जनता की आवाज को अपनी कलम के द्वारा, गीतों के द्वारा, कला के माध्यम से उठाने वालों को साजिशन झूठे-फर्जी मुकदमों में फंसाकर जेलों में डाला जा रहा है. हेम मिश्रा भी इसी साजिश का शिकार हैं. वक्ताओं ने हेम मिश्रा की बिना शर्त रिहाई की मांग करते हुये सभी जनवाद पसन्द व्यक्तियों व संगठनों से गिरफ्तारी के खिलाफ एकजुटता के साथ विरोध का आह्वान किया.
प्रेस को क्रांतिकारी जनवादी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जीवन चन्द्र जेसी, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के पीपी आर्या, राजनीतिक बन्दी रिहाई कमेटी के पान सिंह बोरा, रिटायर्ड प्रोफेसर प्रभात उप्रेती, पूजा भट्ट, चन्द्रकला तिवारी आदि ने संबोधित किया.

Sunday, 25 August 2013

फासीवाद की धमक तेज हो रही है, मुखर प्रतिरोध के लिए एकजुट हों ! - जन संस्कृति मंच

                                                 प्रेस विज्ञप्ति


जन संस्कृति मंच गढ़चिरौली में जेएनयू के छात्र और संस्कृतिकर्मी हेम मिश्रा को गिरफ्तार कर पुलिस रिमांड पर लेने और पुणे में पुलिस की मौजूदगी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं द्वारा एफटीआईआइ्र्र के छात्रों पर हमले और हमले के बाद पुलिस द्वारा घायल छात्रों पर ही अनलॉफुल एक्टिविटी का आरोप लगा देने तथा बलात्कार के आरोपी आशाराम बापू की अब तक गिरफ्तारी न होने की कठोर शब्दों में निंदा करता है। जसम साहित्यकार-संस्कृतिकर्मियों, पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और शोषण-उत्पीड़न-भेदभाव के खिलाफ लड़ने वाले तमाम वाम-लोकतांत्रिक संगठनों से अपील करता है कि सांप्रदायिक फासीवादी संगठनों, काले धन की सुरक्षा, यौनहिंसा व हत्या समेत तमाम किस्म के अपराधों में संलिप्त पाखंडी धर्मगुरुओं तथा उनकी गुंडागर्दी को शह देने वाली सरकारों और पुलिस तंत्र के खिलाफ पूरे देश में व्यापक स्तर प्रतिवाद संगठित करें।  

हेम मिश्रा एक वामपंथी संस्कृतिकर्मी हैं। वे उन परिवर्तनकामी नौजवानों में से हैं, जो इस देश में जारी प्राकृतिक संसाधनों की लूट और भ्रष्टाचार को खत्म करना चाहते हैं। रोहित जोशी के साथ मिलकर उन्होंने उत्तराखंड के संदर्भ में सत्ताधारी विकास मॉडल के विनाशकारी प्रभावों पर सवाल खड़े करने वाली फिल्म ‘इंद्रधनुष उदास है’ बनाई है। उत्तराखंड के भीषण त्रासदी से पहले बनाई गई यह फिल्म हेम मिश्रा के विचारों और चिंताओं की बानगी है। सूचना यह है कि वे पिछले माह नक्सल बताकर फर्जी मुठभेड़ में पुलिस द्वारा मार दी गई महिलाओं से संबंधित मामले के तथ्यों की जांच के लिए गए थे और पुलिस ने उन्हें नक्सलियों का संदेशवाहक बताकर गिरफ्तार कर लिया है। सवाल यह है कि क्या दुनिया का सबसे बड़े लोकतंत्र का दम भरने वाले इस देश में पुलिसिया आतंकराज ही चलेगा? क्या उनके आपराधिक कृत्य की जांच करने का अधिकार इस देश का संविधान नहीं देता?

यह पहली घटना नहीं है, जब कारपोरेट लूट, दमन-शोषण और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर होने वाले बुद्धिजीवियों और संस्कृतिकर्मियों को नक्सलियों का संदेशवाहक बताकर गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार किया गया है? डॉ.विनायक सेन और कबीर कला मंच के कलाकारों पर लादे गए फर्जी मुकदमे इसका उदाहरण हैं। खासकर आदिवासी इलाकों में कारपोरेट और उनकी पालतू सरकारें निर्बाध लूट जारी रखने के लिए मानवाधिकार हनन का रिकार्ड बना रही हैं। सोनी सोरी, लिंगा कोडोपी, दयामनी बरला, जीतन मरांडी, अर्पणा मरांडी जैसे लोग पुलिस और न्याय व्यवस्था की क्रुरताओं के जीते जागते गवाह हैं। दूसरी ओर गैरआदिवासी इलाकों में भी पुलिस नागरिकों की आजादी और अभिव्यक्ति के अधिकार का हनन कर रही है और अंधराष्ट्रवादी-सामंती-सांप्रदायिक गिरोहों को खुलकर तांडव मचाने की छूट दे रखी है। न केवल भाजपा शासित सरकारों की पुलिस ऐसा कर रही है, बल्कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की सरकारों की पुलिस भी इसी तरह का व्यवहार कर रही है। फेसबुक पर की गई टिप्पणी के लिए दलित मुक्ति के विचारों के लिए चर्चित लेखक कंवल भारती पर सपा सरकार का रवैया इसी का नमूना है।




संघ परिवार, भाजपा, कांग्रेस और उनके सहयोगी दल जिस तरह की बर्बर प्रतिक्रियावादी प्रवृत्तियों और धुव्रीकरण को समाज में बढ़ावा दे रहे हैं, उसके परिणाम बेहद खतरनाक होंगे। विगत 20 अगस्त को मशहूर अंधविश्वास-विरोधी, तर्कनिष्ठ और विवेकवादी आंदोलनकर्ता डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की नृशंस हत्या को अंजाम देने वाले हों या डॉ.दाभोलकर की याद में आयोजित कार्यक्रम में एफटीआईआई के छात्रों द्वारा आनंद पटवर्धन की फिल्म ‘जय भीम कामरेड’ के प्रदर्शन और कबीर कला मंच के कलाकारों की प्रस्तुति के बाद आयोजकों पर नक्सलवादी आरोप लगाकर हमला करने वाले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता, जो उनसे नरेंद्र मोदी की जय बोलने को कह रहे थे, सख्त कानूनी कार्रवाई तो इनके खिलाफ होना चाहिए। लेकिन पुलिस ने उल्टे घायल छात्रों पर ही अनलाफुल एक्टिविटी का आरोप लगा दिया है। ठीक इसी तरह अंधआस्था और श्रद्धा की आड़ में बच्चों और बच्चियों को शिकार बनाने वाले आशाराम बापू जैसे भेडि़ये को अविलंब कठोर सजा मिलनी चाहिए, लेकिन वह अभी भी मीडिया पर आकर अपने दंभ का प्रदर्शन कर रहा है। 

मुंबई में महिला फोटोग्राफर के साथ हुए गैंगरेप ने साबित कर दिया है कि सरकारें और उनकी पुलिस स्त्रियों को सुरक्षित माहौल देने में विफल रही हैं, जहां अमीर और ताकतवर बलात्कारी जल्दी गिरफ्तार भी न किए जाएं और महिलाओं के जर्बदस्त आंदोलन के बाद भी पुलिस अभी भी बलात्कार और यौनहिंसा के मामलों में प्राथमिकी तक दर्ज करने में आनाकानी करती हो और अभी भी राजनेता बलत्कृत को उपदेश देने से बाज नहीं आ रहे हों, वहां तो बलात्कारियों का मनोबल बढ़ेगा ही। मुंबई समेत देश भर में इस तरह घटनाएं बदस्तुर जारी हैं। 

जन संस्कृति मंच का मानना है कि हेम मिश्रा को तत्काल बिना शर्त छोड़ा जाना चाहिए और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। छात्र भेषधारी जिन सांप्रदायिक गुंडों ने एफटीआईआई के छात्रों पर हमला किया है और जो पुलिसकर्मी उनका साथ दे रहे हैं, उनके खिलाफ अविलंब सख्त कार्रवाई करनी चाहिए तथा आशाराम बापू को तुरत गिरफ्तार करके उनके तमाम आपराधिक कृत्यों के लिए उन्हें दण्डित किया जाना चाहिए। जसम की यह भी मांग है कि महिलाएं जिन संस्थानों के लिए खतरा झेलकर काम करती हैं, उन संस्थानों को उनकी काम करने की स्वतंत्रता और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए.



 सुधीर सुमन द्वारा जन संस्कृति मंच की ओर से जारी

Condemn the arrest of Comrade Hem on fake charges by the Maharashtra police!

Resist the ongoing witch-hunt of students, intellectuals and activists who dare to stand up against systemic injustice, oppression and state repression! 

Immediately & Unconditionally release Hem who was on his way for medical treatment!


Democratic Students’ Union condemns in strongest possible terms the arbitrary arrest of Hem Mishra, one of our activists by the Maharshtra Police. Hem Mishra is from Almora, Uttarakhand. He is the son of K.D Mishra, a retired school teacher. Hem has done his diploma in Mass communication and B.Sc in Mathematics from Uttarakhand. In 2009 he joined BA programme in Center for Chinese Studies, in School of Language Literature and Cultural Studies. He is also a prominent cultural activist and singer. He is active in Democratic Students’ Union and Revolutionary Cultural Front. He is also an executive member of Committee for Release of Political Prisoners (CRPP). He is well known among the political circles in Delhi and Uttarakhand as a student and cultural activist.
Hem has been struggling over the years with certain physical challenges in his left hand. He has undergone repeated surgery and the ensuing complications left him in agonizing pain. He has had to undergo two rounds of expensive operations in the recent past from Vellore. He had on several occasions shared his wish to pay a visit to Prakash Amte’s People’s hospital in Bhamaragarh to enquire about the possibility of free treatment therein. Early this week he had left from Delhi with the same purpose and was picked up by the notorious Maharashtra police somewhere in Maharashtra on his way to the hospital.

It was on the 24th of August that the police finally admitted his arrest and said he has been sent to Police custody for 10 days. Hem is well known in Delhi and Uttarakhand as a mass activist. Yet the police are trying to frame him with bogus charges like, he is a ‘prominent Naxal courier!!’ Hem has played a major role in exposing as well as countering the anti-people designs of the state through songs, poetry, plays and street theaters in the capacity of a cultural activist lending his voice to that of the oppressed.

He, as part of an organized politics, shares the vision for a radical social transformation of the society towards a new democratic society and a new democratic culture – free of oppression, injustice and inequality. His arrest therefore doesn't come as a shock. The state right now is in a spree to clamp down on students and democratic rights activists and trying to stifle voices of dissent. We strongly condemn this witch-hunt of activists. We must unitedly and resolutely fight the fascist designs of the state and its targeting of political activists.

His arrest is in continuation of the ongoing clamp down on democratic rights activists that Hem has been framed with such false charges. We are witness to similar framing of Jayeeta Das a student and woman activist of Matangini Mahila Samity, the hounding and framing of Kabir Kala Manch activists and similar witch hunting of other democratic rights and cultural activists. We condemn this arbitrary arrest and demand his immediate and unconditional release.
---- DEMOCRATIC STUDENTS’UNION
Contact: dsuatjnu@gmail.com, 09711826861